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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार नवीन तरीकों को अपनाने वाले प्रतिभाशाली शिक्षकों को मान्यता देने का प्रयास कर रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार नवीन तरीकों को अपनाने वाले प्रतिभाशाली शिक्षकों को मान्यता देने का प्रयास कर रही है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि अभिनव पद्धतियों का प्रयोग करने वाले प्रतिभाशाली शिक्षकों को मान्यता देने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने पिछली सरकारों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पहले क्या होता था, इस बारे में वह बात नहीं करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि सरकार अभिनव तरीकों का उपयोग करने वाले प्रतिभाशाली शिक्षकों को मान्यता देने के लिए प्रयास कर रही है। (फोटो साभार: एएनआई)

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि वे युवा विद्यार्थियों को ‘विकसित भारत’ के लिए तैयार कर सकते हैं।

यह बातचीत शुक्रवार को हुई जबकि इसका वीडियो शनिवार को साझा किया गया।

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मोदी ने सुझाव दिया कि शिक्षक देश के शीर्ष 100 पर्यटन स्थलों के चयन में छात्रों को शामिल कर सकते हैं, तथा उन्हें विभिन्न स्थानों के बारे में जानने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं, जहां वे शैक्षणिक दौरे के तहत जा सकते हैं।

मोदी ने कहा कि सम्मानित शिक्षकों का चयन लंबी प्रक्रिया के बाद किया गया है, क्योंकि उनके प्रयास नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) में उपयोगी हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि कई अन्य शिक्षक भी उत्कृष्ट कार्य कर रहे होंगे।

उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे अपने विद्यार्थियों को निकटवर्ती विश्वविद्यालयों में ले जाएं और वहां खेल संबंधी कार्यक्रम दिखाएं, क्योंकि यह अनुभव उनके सपनों को उड़ान दे सकता है।

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एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि इस पुरस्कार के लिए देश भर से 82 शिक्षकों का चयन किया गया। इनमें स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के 50, उच्च शिक्षा विभाग के 16 और केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के 16 शिक्षक शामिल हैं।

मोदी ने सुझाव दिया कि पुरस्कार प्राप्त शिक्षक सोशल मीडिया पर एक-दूसरे से जुड़ें और अपनी सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करें ताकि हर कोई सीख सके, अपना सके और लाभान्वित हो सके।

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उन्होंने एनईपी के प्रभाव पर प्रकाश डाला और मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने के महत्व के बारे में बात की।

प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि शिक्षक अपने विद्यार्थियों को विभिन्न भाषाओं में स्थानीय लोककथाएं पढ़ाएं ताकि वे अनेक भाषाएं सीख सकें और भारत की जीवंत संस्कृति से भी परिचित हो सकें।

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